आरंभ ई पत्रिका 14वां अंक (अनुक्रमणिका)

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संपादकीय
प्रसंग (संपादकीय) | शैलेंद्र कुमार सिंह 

शोधालेख
प्रसाद की दृष्टि में नारी का स्वरूप | डॉ॰ वसुन्धरा उपाध्याय
गुलज़ार की कहानियों में भारत विभाजन की त्रासदी : एक अध्ययन | सुकान्त सुमन
श्रीलाल शुक्ल के उपन्यास ‘राग दरबारी’ में व्यवस्था की विडम्बना | ऐश्वर्या पात्र
रामभक्ति साहित्य में नारी चिंतन | प्रिया कौशिक
ध्रुवस्वामिनी में स्त्री-चिंतन |अनुराधा
देवता बनाम असुरः एक अन्तहीन संघर्ष | अम्बरीन आफताब
ट्रैफिकिंग बनाम यौन-उद्योग | उर्मिला कुमारी
क्या भूलूँ क्या याद करूँ में बोलता कवि हृदय | चावड़ा संजय करमणभाई
राही मासूम रज़ा का ‘आधागाँव’ और राष्ट्रप्रेम | विशाल कुमार सिंह

लेख 
अभिव्यक्ति के अधिकार का दमन क्यों? | सुबोध ठाकुर  
वर्तमान परिदृश्य में युवाओं की ग्रामीण विकास में सक्रिय भूमिका |  सिम्मी चौहान
भीष्म साहनी: मानवीय संवेदना के सशक्त हस्ताक्षर | आशीष कुमार
उत्त्तर आधुनिकता के दौर में भी असुरक्षित स्त्रियाँ | अमित कुमार झा

समीक्षा
प्रज्ञा का ‘गूदड़ बस्ती’ और गीताश्री का ‘हसीनाबाद’ | पंकज सुबीर 
कामकाजी स्त्रियों की सामाजिक स्थिति: एक विमर्श | डॉ. वर्षा रानी 
गूदड़ बस्ती | गंगाशरण सिंह

कुछ कलम से
नींव के पत्थर | वेदप्रकाश लाम्बा
भीतर का सन्नाटा | रंगनाथ द्विवेदी
डॉ. अन्जु की दो कविताएं
नीना छिब्बर की कविताएं
फूलों की खेती | चन्द्र मोहन किस्कु
चेतना की दो कविताएं
मोह भंग हुआ जब मेरा | अमिता गुप्ता मगोत्रा
विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’ की ग़ज़ल
राहुल प्रसाद की ग़ज़लें
दिनेश गुप्ता ‘दिन’ की तीन ग़ज़लें
उर्वी की दो ग़जलें
रूठ जाना तुम मगर ये गुंजाइस रहे | जुगुल किशोर चौधरी

किस्सा गोई
‘गीता’| अश्विनी प्रताप सिंह

लघु कथा
खजूर की छाँव | डॉ. संगीता गाँधी 
मूर्ति भंजक | अपर्णा झा
पधारो म्हारे देस | डॉ. शिवानी सिंह 
एक तस्वीर | कुँवर प्रतीक सिंह
डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की दो लघु कथाएं

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