रूठ जाना तुम मगर ये गुंजाइस रहे : जुगुल किशोर चौधरी

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रूठ जाना तुम मगर ये गुंजाइस रहे,
रूठकर भी दिल में मनाने की चाहत बाकी रहे।
हश्र यूँ न हो मोहब्बत में हम दोनों का,
जिस्म तो रहे पर जान बाकी न रहे।
सम्हाल लेते हैं चलो अपने आप को हम दोनों,
ऐसा न हो कि फिर होश बाकी न रहे।
दोनों ही जल रहे हैं मोहब्बत में रात दिन,
कहीं दिया-बाती तो रहे पर तेल बाकी न रहे।
तेरे प्यार की ज्योति से चल रही है जिन्दगी अपनी,
मान जाओ कहीं फिर ये जिन्दगी रहे न रहे।।

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