दिशा- निर्देश

शोध आलेख सम्बंधी विशेष सूचना
आरंभ ई-पत्रिका, शोधालेख प्रकाशन के लिए किसी भी प्रकार की सहयोग राशि नहीं लेती है और इस तरह के किसी भी नियम का खंडन करती है। इसके साथ ही शोधार्थियों द्वारा भेजे जाने वाले शोधालेख को प्रकाशित करना और प्रकाशित न करना शोध आलेख की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा, जिसके निर्णय का अधिकार सिर्फ और सिर्फ आरंभ के संपादकीय मंडल को है।
शोध आलेख में उल्लिखित सन्दर्भ को दर्शाने के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का पैटर्न अपनाने को प्राथमिकता दें!
आपको लिंक उपलब्ध कराया जा रहा है- ऑक्सफ़ोर्ड युनिवर्सिटी के अनुसार दिशा निर्देश

ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के नियमानुसार ग्रंथों के संदर्भ का एक उदाहरण देखें-
*)- साहनी, भीष्म (२०१४), हानूश(दूसरी आवृत्ति), दिल्ली-०२, राजकमल पेपरबैक्स प्रकाशन: दरियागंज, पृष्ठ-५४
इसी प्रकार पत्रिका, इंडेक्स, साक्षात्कार आदि के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

कुछ और ज़रूरी बातों का ध्यान रखें-
१)- शोध आलेख न्यूनतम १५०० शब्दों का होना चाहिए।
२)- एंड नोट के रूप में संदर्भों का उल्लेख करें।
३)- प्रत्येक उद्धरण, पद, वाक्यांश, साक्षात्कार, इंडेक्स आदि के संदर्भों का उल्लेख अनिवार्यतः करें, नहीं तो आपका शोध-आलेख शोध-कार्य के रूप में स्वीकार्य नहीं होगा या शामिल नहीं किया जाएगा।
४)- अगर किसी अन्य विचारक, लेखक, पुस्तक, साक्षात्कार आदि से कोई संदर्भ अप्रत्यक्ष तौर पर भी (सीधे शब्दों में ज्यों का त्यों नहीं) लिया गया है, तो भी उसके संदर्भ का उल्लेख अनिवार्यतः करें।
५)- अगर आप ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी का पैटर्न अपनाने में असमर्थ हैं तो यू॰जी॰सी॰ द्वारा निर्देशित नवीनतम संदर्भ ग्रंथ शैली के नियमों का पालन करें।
६)- संदर्भ ग्रंथों, पत्रिकाओं आदि का उल्लेख करते समय लेखक/ सम्पादक/अनुवादक आदि के साथ-साथ प्रकाशक, प्रकाशन स्थान, संस्करण और पृष्ठ संख्या का उल्लेख भी करें।

नोट- कॉपीराइट संबंधी चोरी का आरोप लगने पर जिम्मेदारी रचनाकार/शोधार्थी की होगी, आरंभ ई-पत्रिका की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। किसी भी लेख के विवादित होने पर, उससे सम्बंधित उचित प्रमाण मिलते ही उसे पत्रिका से हटा दिया जाएगा और भविष्य में पत्रिका, लेखक को स्थान नहीं देगी। शोधालेख संदर्भों के प्रसंग में सम्पादकीय मंडल द्वारा यह क़दम शोधालेखों को गुणात्मक स्तर पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए उठाया गया है।