काव्यांजलि: नीरज जी अमर रहें | गोपाल कौशल

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गीत  गंगा  का  भागीरथ
दिया गीतों को मधुर लय ।
साहित्य  जगत  का  नूर
हमसे रुठ  गया असमय ।।

कालजयी  रचनाएँ  गढ़
दिया  जगत में  परिचय ।
रुठ  गया  स्वर  साधक
हँसते- गाते वो असमय ।।

धनी कलम के श्रेष्ठ कवि
हुये महान जग लोकप्रिय ।
कोटि-कोटि  नमन  पद्मश्री
नीरज जी अमर – अजय ।।

इनके  गीत  गूंजते  रहेंगे
युगों तक ले नव सूर्योदय ।
कैसे कहें  अंतिम प्रणाम
इन्हें बसे हैं जो चक्षु-ह्रदय ।।

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